वीर बाल दिवस (brave children day) कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी, मार्च – पास्ट को भी दिखाएंगे हरी झंडी ।

वीर बाल दिवस (brave children day) कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी, मार्च – पास्ट को भी दिखाएंगे हरी झंडी ।
brave children day 2023: वीर बाल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी

वीर बाल दिवस (brave children day), आज प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारत मंडपम के कार्यक्रम में शामिल होने की घोषणा ।

Veer Bal Diwas 2023 (न्यूज़ अपना टोंक) : आज, 26 दिसंबर, भारत में एक विशेष दिन है जिसे ‘वीर बाल दिवस’ (brave children day) के रूप में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजधानी में स्थित भारत मंडपम में इस अद्वितीय दिन पर आयोजित किए गए ‘वीर बाल दिवस’ कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई और युवाओं के साथ एक मार्च-पास्ट का समर्थन किया, और हरी झंडी दिखाई। पिछले साल 9 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के दिन, प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों, साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत की स्मृति में‘वीर बाल दिवस’ (brave children day) मनाया जाएगा।

Veer Bal Diwas 2023: वीर बाल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी
                                        brave children day 2023: वीर बाल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी

इस घड़ी में राजधानी में युवा द्वारा मार्च पास्ट किया जाएगा।

‘वीर बाल दिवस’ (brave children day) के शानदार दिन की ऊर्जा को सहेजते हुए, सरकार ने तय किया है कि देशवासियों को विशेषकर छोटे बच्चों को साहिबजादों को अत्यंत साहसपूर्ण किस्से से रूबरू कराने और उन्हें इस उत्कृष्ट उदाहरण से प्रेरित करने के लिए देशभर में सहभागी कार्यक्रमों का आयोजन किया है। सरकार ने पूरे देश में भागीदारीकरण भरे कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिसका उद्देश्य साहिबजादों की अद्वितीय साहस की कहानी को नागरिकों, विशेषकर छोटे बच्चों को सूचित और शिक्षित करना है। इन पहलों का हिस्सा बनते हुए, स्कूल और बच्चा संरक्षण संस्थानों में साहिबजादों के जीवन की कहानी और बलिदान को दर्शाने वाली एक डिजिटल प्रदर्शनी सभी जगह होगी।

देशभर में प्रदर्शित की जाएगी फिल्म :-

प्रधानमंत्री ने 9 जनवरी 2022 को, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के दिन, इस महत्वपूर्ण घड़ी की घोषणा की थी। इस अवसर पर 26 दिसंबर को श्री गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत की स्मृति में ‘वीर बाल दिवस’ का आयोजन किया जाएगा। देशभर में हमें देखने को मिलेगी एक अद्वितीय फिल्म, जो शीर्षक से होगी ‘वीर बाल दिवस’ (brave children day)। इस दिन, देशवासियों को यह अद्वितीय कला के रूप में साझा किया जाएगा, जिसमें साहिबजादों के बलिदान और साहस की कहानी अद्वितीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत की जाएगी। इसके साथ ही, माई भारत और माईगव पोर्टल के माध्यम से होने वाले इंटरैक्टिव क्विज़ जैसे ऑनलाइन प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होगा, जो जनता को इस महत्वपूर्ण दिन पर जागरूक करेगा।

वीर बाल दिवस का इतिहास :-

इस प्रभावशाली घड़ी के पीछे एक दिलचस्प कहानी छिपी है। मुगल शासन के काल में पंजाब में सिखों के प्रेरणा स्त्रोत, गुरु गोबिंद सिंह, के चार वीर संतानें थे, जिन्हें चार साहिबजादे या ‘खालसा‘ कहा जाता था। इस अद्भूत संतान के साथ, 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की नींव रखी, जिसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक उत्पीड़न से पीड़ित सिख समुदाय की सुरक्षा थी। गुरु गोबिंद सिंह के तीन पत्नियों से उत्पन्न हुए चार शूरवीर बच्चे, अजीत, जुझार, जोरावर, और फतेह, सभी खालसा के अभिभूत अंग थे इन चारों नौजवानों को सिर्फ 19 वर्ष की आयु तक ही मुगल सेना द्वारा दुनियाभर में बहुतेरे युद्धक्षेत्रों में साहसी रूप से युद्ध करना पड़ा। उनकी बहादुरी और बलिदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’(brave children day) के रूप में समर्पित किया जाएगा।

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वीर बाल दिवस का महत्व

वीर बाल दिवस (brave children day) एक ऐसा उत्सव है जो खालसा के चार साहिबजादों के शौर्य और बलिदान को समर्पित है। यह दिन उन अद्वितीय सीखों को समर्पित है जिन्होंने अपने आस्था के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। वीर बाल दिवस एक ऐसा मौका है जब हमें उनकी महानता और बलिदान को समझने और मानने का अवसर मिलता है।

गुरु गोबिंद सिंह के छोटे बच्चों की अंतिम सीख ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जब वे अपने आस्था की रक्षा करते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिए। इस दिन हमें उनकी शौर्यपूर्ण कहानियों को याद करने का अवसर मिलता है, साथ ही यह जानने का मौका मिलता है कि उनकी निर्मम हत्या कैसे हुई, विशेषकर जोरावर और फतेह सिंह की।

सरसा नदी के तट पर हुए एक युद्ध में, मुगल सेना ने दोनों साहिबजादों को बंदी बना लिया था। इस दुःखद घड़ी में, जब उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल नहीं किया, तो उन्हें 8 और 5 साल की उम्र में क्रमशः जिंदा दफन कर दिया गया था। वीर बाल दिवस(brave children day) इस अत्यंत मुल्यवान पल की याद में मनाया जाता है जब हम उन महान योद्धाओं के साहस और त्याग को सलामी अर्पित करते है।

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Surendra Jain

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