करवा चौथ,100 साल बाद चतुर्महायोग में मनेगा सुहाग पर्व।

करवा चौथ,100 साल बाद चतुर्महायोग में मनेगा सुहाग पर्व।

करवा चौथ (Karva Chauth), आपके शहर में कब दिखेगा चांद जानिए 30 शहरों में चंद्र दर्शन का समय, 100 साल बाद चतुर्महायोग में मनेगा सुहाग पर्व।

करवा चौथ (न्यूज़ अपना टोंक) – आज सुबह से सुहागनों ने करवा चौथ (karva chauth) व्रत रखा हुआ है, जो शाम को चंद्रमा की पूजा के बाद खत्म हो जाएगा। देशभर में चंद्रमा आज शाम 7 से  9 बजे तकदिख जाएगा। जो कि चंद्रमा पूर्व – उत्तर दिशा के बीच नजर आएगा।  ये व्रत खास है, क्योंकि आज बुधवार है। ज्योतिषियों का कहना है कि आज के ग्रह-नक्षत्र सर्वार्थसिद्धि, अमृत, सुमुख और कुलदीपक योग बना रहे हैं।  ऐसा चतुर्महायोग पिछले 100 साल में नहीं बना। करवा चौथ यानि आज बुधवार और चतुर्थी का संयोग भी बन रहा है। इस तिथि और वार, दोनों के देवता गणेश जी ही हैं। इन ग्रह स्थिति और शुभ संयोग से व्रत का पुण्य और बढ़ जाएगा।

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अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य।

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम, पूर्व IPS मीरा बोरवंकर का खुलासा।

शहर में चंद्रमा दिखने का समय – शहर  –  समय (रात) :- गुवाहाटी – 7.23, दिल्ली -8.15 ,कोलकाता – 7.47, अमृतसर – 8.16, पटना – 7.52, रायपुर – 8.17, रांची – 7.57, जबलपुर – 8.19, बनारस – 8.01, जयपुर – 8.26, मनाली – 8.05, भोपाल – 8.30, लखनऊ – 8.05, आगरा – 8.32, प्रयागराज – 8.06, इंदौर – 8.38, जोधपुर – 8.39, देहरादून – 8.07, शिमला – 8.08,  उदयपुर – 8.41, कानपुर – 8.09, औरंगाबाद-  8.47, चंडीगढ़ – 8.12, अहमदाबाद – 8.50, जम्मू – 8.12, वडोदरा -8.53, कुरुक्षेत्र – 8.12, पुणे – 8.57, पानीपत –  8.14, मुंबई – 9.00  – सोर्स –  खगोल विज्ञान के कोलकाता मुंबई।

वामन पुराण में बताई व्रत कथा में वीरावती अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास रखकर चंद्रमा निकलने का इंतजार करती है। भूख-प्यास से परेशान बहन को बेहोश होते देख उसका भाई मशाल लेकर बरगद पर चढ़ जाता है और पत्तों के बीच उजाला करता है। जिसे वीरावती चंद्रमा की रोशनी समझकर व्रत खोल लेती है। इसके बाद वीरावती के पति की मृत्यु हो जाती है। इसके बाद वीरावती को देवी पार्वती फिर से ये व्रत करने को कहती हैं। व्रत करने से वीरावती को सौभाग्य मिलता है व  उसका पति फिर जिंदा हो जाता है।

karva chauth
करवा चौथ व्रत सामग्री।

करवा चौथ (karva chauth) व्रत, पति के लिए व्रत की परंपरा सतयुग से, (इसकी दो कहानियां)

पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने की परंपरा सतयुग से चल रही है। इसकी शुरुआत सावित्री के पतिव्रता धर्म से हुई,  जब यम आए तो सावित्री ने अपने पति को ले जा से रोक दिया और अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से पति को फिर से पा लिया। तब से पति की लंबी उम्र के लिए व्रत किए जाने लगे, दूसरी कहानी पांडवों की पत्नी की है। वनवास काल में अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि के पर्वत पर चले गए,  द्रौपदी ने अर्जन की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से मदद मांगी, उन्होंने द्रौपदी को वैसा ही उपवास रखने को कहा जैसा माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। द्रौपदी ने ऐसा ही किया और कुछ ही समय के बाद अर्जुन वापस सुरक्षित लौट आए।

अच्छी फसल की कामना के लिए शुरू हुआ ये व्रत ये त्योहार रबी की फसल की शुरुआत में होता है। इस वक्त गेहूं की बुवाई भी होती है। गेहूं के बीज को मिट्टी के बड़े बर्तन में रखते हैं, जिसे करवा भी कहते हैं। इसलिए जानकारों का कहना है, कि ये पूजा अच्छी फसल की कामना के लिए शुरू हुई। बाद में महिलाएं सुहाग के लिए व्रत रखने लगीं। ये भी कहा जाता है कि पहले सैन्य अभियान खूब होते थे। सैनिक ज्यादातर समय घर से बाहर रहते थे। ऐसे में पत्नियां अपने पति की सुरक्षा के लिए करवा चौथ (karva chauth) का व्रत रखने लगीं।

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Vimal Jola

विमल जौला निवाई शहर के न्यूज़ रिपोर्टर है। जिनका मुख्य उद्देश्य निवाई तहसील के आस पास की सभी खबरों को जन जन तक पहुंचाना एवं जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। अपने आस पास की ख़बरों, लेखों एवं विज्ञापन के लिए सम्पर्क करें - 8104889200, 9251566935

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